Page 41 - E-Patrika 5th Hindi Edition
P. 41

ं
                                                       ं
                                           7.  ान एव कौशल सग्रह प्रस्तुित


                                                     ूं
                     खद को तुम क्य परशान करते हो......
                                                           े
                          ु
                                हर वक्त खुद को तुम क्यू परेशान करते हो,
                                                                ं
                                    बाग खु शया  को क्यू वीरान करते हो।।
                                                              ं

                                          प रवत न सत्य ह प्रक ृ  त का,
                                                              ै
                                                            ं
                                     जानकर भी ये क्यू अजान बनते हो।।
                                                                ं
                                    ढूढोगे तो पाओगे बहुत छोटी होती ह,
                                      ं

                                            वजह खुश होने क े   लए।।



                                          बेहतर से बेहतर न क  तलाश

                                                      ै
                                     वजह बनती ह उदास होने क े   लए।।


                                   तलाशोगे तो पाओगे खु शया  क े  खजाने

                                                ह्रदय क े  सागर म ।।


                                          होड़ म  दु नया क  भुलाकर,


                                 क्यू समेटते हो खुद को दुखा  क े  गागर म ।।
                                     ं

                                      तनका  क  आश म  लम्हे खोना नह ,

                                       हसने वाले पला  म  तू रोना नह ।।
                                         ँ


                                       बाद पाने क े  तुम ये समझ पाओगे,

                                      चीज  म ी ही थी कोइ सोना नह ।।


                                      बाद मुद्दत क े  तुम ये समझ पाओगे,


                                                                        ै
                                      मुडक े  देखोगे कल  कतने हरान थे।।

                                                                     ै
                                                  ै

                                     जो अभी ह वही  जदगी ह "अ मत",
                                                                      ं
                                                        ै
                                      ये वही आज ह  जससे अजान थे।।




                                             अ मत क ु मार अव धया

                                   सॉ टग अ सस्ट ट, आरएमएस ‘जेबी’  डवीजन, जबलपुर




                                                           32
   36   37   38   39   40   41   42   43   44   45   46